छत्तीसगढ़

टॉयलेट में हुई प्रसव के बाद प्री-मैच्योर नवजात की पांच दिन तक इलाज के बावजूद मौत

Shantanu Roy
22 Nov 2025 11:55 PM IST
टॉयलेट में हुई प्रसव के बाद प्री-मैच्योर नवजात की पांच दिन तक इलाज के बावजूद मौत
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छग
Ambikapur. अंबिकापुर। अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में एक गंभीर और दुखद घटना सामने आई है। यहां टॉयलेट में हुई अचानक प्रसव के बाद नवजात को पांच दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन अंततः उसकी मौत हो गई। चिकित्सकों के अनुसार, नवजात प्री-मैच्योर था और उसके जैविक अंग पूरी तरह से अविकसित थे, इसलिए बचाना अत्यंत कठिन था। प्रसूता लगभग 7 माह की गर्भवती थीं। जानकारी के अनुसार, सूरजपुर जिले के प्रतापपुर निवासी रामपति बाई पति सूरज सात को राजमाता देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (एमसीएच) में भर्ती कराया गया था। प्रसव से पहले ही लगभग दो महीने पहले प्रसूति पीड़ा शुरू होने के कारण महिला का इलाज चल रहा था।
अचानक टॉयलेट में प्रसव
15 नवंबर की सुबह लगभग 10.30 बजे रामपति टॉयलेट गईं और उसके बाद वार्ड में लौटकर सो गईं। आधे घंटे बाद जब उन्हें एहसास हुआ कि उनका पेट खाली है, उन्होंने शोर मचाया। अस्पताल के सफाईकर्मियों ने टॉयलेट के सेप्टिक सीट की जांच की, तो नवजात फंसा हुआ पाया गया। स्वास्थ्य कर्मियों ने काफी प्रयासों के बाद बच्चे को बाहर निकाला। नवजात को तुरंत SNCU में वेंटिलेटर पर रखा गया और डॉक्टरों ने उसकी जिंदगी बचाने के लिए इलाज शुरू किया। डॉक्टरों ने बताया कि नवजात लगभग एक घंटे तक सेप्टिक सीट में फंसा रहा, लेकिन इसके बावजूद वह जीवित था। इसके बाद वेंटिलेटर में रखकर लगातार इलाज किया गया। इलाज के दौरान नवजात की स्थिति में थोड़ी सुधार हुई और उसे वेंटिलेटर से बाहर निकाला गया, लेकिन कुछ समय बाद उसकी तबियत फिर बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उसे फिर से वेंटिलेटर पर रखा, लेकिन नवजात जीवन की जंग हार गया।
चिकित्सकीय प्रयास और कारण
सिविल सर्जन और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जेके रेलवानी ने बताया कि नवजात प्री-मैच्योर था और उसके जैविक अंग पूर्णत: अविकसित थे। ऐसे शिशुओं को बचाने की संभावना काफी कम होती है। उन्होंने कहा, “हमने सभी प्रयास किए, नवजात कुछ दिनों तक ठीक भी रहा, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।” नवजात की मौत के बाद उसका शव परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंपा गया। परिवार और अस्पताल प्रशासन इस घटना से गहरे दुखी हैं। अस्पताल की टीम ने बताया कि इस तरह की आकस्मिक प्रसव घटनाओं में सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है।
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